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श्रुत रत्नाकर, अहमदाबाद एवं राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली द्वारा आयोजित हस्तप्रत विज्ञान कार्यशाला सम्पन्न

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श्रुत रत्नाकर, अहमदाबाद एवं राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के संयुक्त तत्त्वावधान में अहमदाबाद में हस्तप्रत विज्ञान कार्यशाला के 21 व्याख्यान दिनांक 26 से 29 नवम्बर तक आयोजित किये गये. 26 नवम्बर को अपने चावी रूप संबोधन में प्रो. जितेन्द्र बी. शाह ने इस विद्या कि उपयोगिता एवं महत्व तथा राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के कार्यकलापों पर प्रकाश डाला. इस कार्यशाला में डॉ शाह ने हस्तप्रत विज्ञान के विविध पहलू, जैन धर्म में हस्तप्रत लेखन, हस्तलिखित ग्रंथों में उपलब्ध धर्म-दर्शन साहित्य, हस्तलिखित ग्रंथों में उपलब्ध इतिहास, संस्कृति आदि विषयों पर प्रकाश डाला.


डॉ. बालाजी गणोरकर ने भारत में लेखन परम्परा का विकास, हस्तप्रत विज्ञान का परिचय, भंडारों का प्रबन्धन, परम्परा गत एवं आधुनिक पद्धति से सूचीकरण पद्धति तथा इसमें कम्प्यूटर के उपयोग विषय पर अपने व्याख्यान दिये.

डॉ. प्रीति पी. पंचोली ने नागरी लिपि तथा डॉ. हेमवतीनंदन शर्मा ने सभी लिपियों की जननी ब्राह्मी लिपि का अध्यापन एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया. हस्तप्रतों के रखरखाव, संरक्षण एवं पुनरुद्धार हेतु श्री शैलेष कुमार जी. महेरिया ने प्रशिक्षण दिया.

समापन कार्यक्रम के समापन में प्रो. सिद्धार्थ भट्ट तथा प्रो. जितेन्द्रभाई शाह ने प्रतिभागियों को संबोधित किया. अपने अध्यक्षीय भाषण में भारत के विविध हस्तप्रत भंडारों तथा उनके सूचीपत्रों का विस्तार से वर्णन किया. श्रुत रत्नाकर के ट्रस्टी प्रो. जीतेन्द्रभाई शाह ने प्रतिभागियों को हस्तप्रतों के पढने, पढाने तथा इनमें छिपे ज्ञान को उजागर करने का पूरजोर आह्वान किया. ज्ञातव्य हो कि श्रुत रत्नाकर ट्रस्ट शिक्षण क्षेत्र में विविध प्रवृत्तियों जैसे संशोधन, संपादन, विशिष्ट ग्रंथों के प्रकाशन तथा भारत की परम्परागत विरासत एवं प्राकृत, संस्कृत आदि भाषाओं के उन्नयन हेतु कार्यशील रहा है.

इस अवसर पर प्रतिभागियों ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए श्रुत रत्नाकर एवं राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के सद्प्रयासों की प्रशंसा की और कहा कि ऐसे कार्यक्रम थोड़ी अधिक मात्रा में तथा लम्बी अवधि के होने चाहिए. कार्यक्रम का संचालन डॉ. बालाजी गणोरकर ने किया प्रो. प्रशान्त दवे ने धन्यवाद ज्ञापन किया.